बच्चा गुस्सैल हो रहा है तो रखें इन 5 बातों का ख़याल

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Do's and Don'ts of Teaching Your Child to Cope with Anger
प्रियंका तिवारी, गेस्ट राइटर 

हर रोज काम से घर लौटने पर जब बच्चे आसपास दिखते हैं, तो हमारी थकान न जाने कहां गुम हो जाती है। दिन, महीने, साल सब इनकी मासूम शैतानियों के आगे पलक झपकते ही बीतते चले जाते हैं।

इन्हीं सब के बीच कई बार ऐसे पल भी आते हैं जब हमें बच्चों के तेज गुस्से का सामना करना पड़ता है। बच्चों का यह गुस्सा कभी किसी खिलौने को लेकर होता है, तो कभी कुछ खास स्नैक्स के कारण। इस तरह वजह बदलती जाती हैं और साथ में बदलता है उनके गुस्से का रूप। कई बार तो यह गुस्सा इतना तेज होता है कि माता पिता को  खुद ही समझ नहीं आता कि इसे कैसे कन्ट्रोल किया जाना चाहिए।

एक अच्छे पेरेन्ट होने के नाते यह बहुत जरूरी है कि हम खुद बच्चों से बात करें और उन्हें अपने गुस्से पर काबू करने के तरीके सिखाएं…

1. बच्चे के साथ बात करके गुस्से के कारण का पता किया जा सकता है और यदि हमारा बच्चा हमसे बात करने में सहज महसूस नही कर रहा है तो इसके लिए आप उसके पसंदीदा टॉय की भी मदद ले सकते हैं। और खेल – खेल में जान सकते हैं उसके गुस्से की असली वजह।

2. कई बार बच्चे जब गुस्से में अपने हाथ पैरों को पटकने लगते है, या फिर मिट्टी व किसी अन्य चीज पर उछलना शुरू कर देते हैं। तो ऐसे में माता पिता को उसपर गुस्सा करने की जगह उसका ध्यान बदलने की कोशिश करनी चाहिए। उससे कुछ ऐसा करने के लिए मोटीवेट करना चाहिए जिसमें उसकी दिलचस्पी हो। जिसे करने में उन्हें मज़ा आता हो, जैसे ड्रांइग, रीडिंग या कुछ और मजेदार।

3. गुस्से के दौरान अक्सर बच्चों के लिए हमारा नजरिया उन्हें इग्नोर करने का रहता है, और वही आदत बच्चे के गुस्से को बढ़ावा देने में मददगार साबित होती है। बेहतर यही होगा कि हम बच्चों के साथ रहकर वक्त बिताएं। कुछ इनडोर व आउटडोर गेम्स खेंले ताकि उस बीच उनके हाई टेम्परामेंट की वजहों को समझा जा सके।

4. गुस्से में बच्चे कई बार हमें ही अजीब तरह से चिढ़ाने की कोशिश करते हैं, ऐसे में हमें खुद अपने गुस्से को कन्ट्रोल की जरूरत पड़ती है। जब बच्चे हमें शांत देखते हैं, तो वक़्त के साथ वो भी अपने गुस्से पर कंट्रोल करना और शांत रहना सीखते हैं। हमारी यह आदत कई बार बच्चों के लिए भी प्रेरणा का काम करती है।

5. बच्चे अनमोल होने के साथ, कोरे कागज की तरह होते है, हम उन्हें जो दिखाते व सिखाते हैं, वो उसी को अपनाते हुए आगे बढ़ते हैं। ऐसे में बस हमारी थोड़ी सी समझ बच्चों में अच्छी आदते विकसित करने के लिए काफी है।