ताकि बच्चे को पढ़ना लिखना लगे एक इंडोर एक्टिविटी

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Pic credit: Youandkids

क्या है बच्चे को पढ़ाने की सही उम्र ? क्या आपके भी दिमाग में ये बाद रह रह कर आती है जब आप अपने एक से दो साल के बच्चे को देखती हैं ? बच्चों की परवरिश हर माता – पिता की ज़िंदगी का सबसे अहम् हिस्सा होता है। बच्चे को सही समय पर सही तरीके से अगर आप किताबी शिक्षा देंगे तो ये पल आपको स्ट्रेस देने की बजाये आपके लिए भी स्ट्रेस बस्टर का काम कर सकते हैं।

अक्सर कई माता – पिता लगता है की बच्चों को पढ़ने का समय स्कूल जाने के दिन से शुरू होता है। पर ऐसा नहीं है। उससे पहले ही आपको अपने बच्चे को स्कूल और पढाई लिखाई के लिए तैयार करना चाहिए ताकि वो पढ़ने से दिल न चुराए। उससे पढ़ना लिखना एक इंडोर एक्टिविटी की तरह लगे।

अब आप सोच रहे होंगे की कैसे ? अगर आप इन छोटी छोटी बातों का ख्याल रखेंगे तो ऐसा संभव है।

1. अपने मासूम को रूम को कलरफुल और दिलचस्प बनाये। अगर आप उसके लिए एक अलग रूम नहीं दे सकते हैं तो अपने रूम में ही उसके लिए एक कार्नर तैयार करें। जिसे सजाने के लिए आप एजुकेशनल टॉयज का इस्तेमाल कर सकते हैं।

2. आप अपने बच्चों को राइम्स यानी हिंदी इंग्लिश कविताओं को सुनाकर बिजी रखें। इसका मतलब ये नहीं है की आप बच्चे के हाथ में मोबाइल दे दें। या उससे पूरा टाइम टीवी के आगे बैठा कर रखें। राइम्स का इस्तेमाल आप बैकग्राउंड म्यूजिक की तरह भी कर सकती हैं। ताकि वो उन्हें सुन सके। छोटे बच्चों को पढ़ने के लिए म्यूजिक का सहारा लेना सबसे बेहतर ऑप्शन है।

3. अपने घर में मौजूद रंगों इ कराएं बच्चे से पहचान। दीवारों पर कौन सा रंग है ? दरवाज़ों पर कौन सा रंग है। सोफे का रंग कौन सा है ? दिवार पर लगी घड़ी में कौन सा रंग है ? इस तरह से भी आप एक एक करके अपने बच्चों को रंगो की पहचान करा सकते हैं।

क्योंकि डॉक्टर्स भी इस बात को मानते हैं कि 2 से 5 साल तक बच्चों का मानसिक विकास 80 प्रतिशत हो चुका होता है और उसी वक्त उन्हें अच्छी आदतें सिखानी चाहिए।