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Photo Courtesy : Nilesh R

Nilesh Rao
मनोज वाजपेयी, स्मिता तांबे, कुमुद मिश्र, आदर्श ग्रोवर स्टारर फिल्म रुख रिलीज़ हो चुकी है। एक खास क्लास में इस फिल्म को खास पसंद भी किया जा रहा है। अगर आपको लीक से हटकर बनी फिल्में पसंद हैं तो आपको भी ये फिल्म ज़रूर पसंद आएगी।  मराठी और हिंदी फिल्मो में अपने बेहतरीन अदाकारी से दर्शकों का का मन मोहने वाली अभिनेत्री स्मिता ताम्बे ने फिल्म रुख में मनोज बाजपेयी के साथ अभिनय किया है। मुंबई में अपने मढ़ आइलैंड वाले घर से स्मिता ने की ख़ास बातचीत सिटी वुमन मैगज़ीन के साथ अपनी फिल्म रुख के चल्लेंजिंग रोल, अपकमिंग प्रोजेक्ट्स और अपने ड्रीम डेस्टिनेशन के बारे में। प्रस्तुत है इंटरव्यू के कुछ अंश:
रुख फिल्म में अपने रोले के बारे में कुछ बताए ?
इस फिल्म की बात करे तो हमारी ज़िन्दगी में कुछ ऐसी घटनाएं होती है जिनके बारे में हम कभी सच्चाई तक जाके बात नहीं कर पाते यह कहानी ऐसे इंसिडेंट पर आधारित है जहा बहुत सारे रिलेशन्स है, उन के अलगअलग कंट्रिब्यूशंस है और बहुत सारे रिश्ते उलझ जाते है और बाद में वह कैसे सुलझते है यह रुख फिल्म में सच्चाई से दर्शाया गया है । जब मैने फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ी तो मैं इस रोल से इंस्टैंटली बहुत अटैच हो गयी। स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद मैने, डायरेक्टर अतनु मुख़र्जी को फ़ोन किया और कहा की यह कहानी बहुत लाजवाब है और उसी समय ये तय हुआ की माँ का किरदार मैं करुँगी। मैं अपने आप को बहुत खुसनसीब समझती हूँ कि मैं “रुख” का हिस्सा बनी।  
मैं इस फिल्म में माँ का रोल प्ले कर रही हूँ. यह महाराष्ट्रिन महिला मिडिल क्लास बैकग्राउंड से आयी है जिसकी शादी नार्थ इंडियन लड़के से हुई है“रुख” एक लड़के की यात्रा पर आधारित फिल्म है, जो उसके खोए हुए पारिवारिक संबंधों को फिर से खोजता हैं, अनेक रहस्यों और यादों के माध्यम से।
इस फिल्म  में मनोज बाजपाई जी का साथ काम करने का कैसा अनुभव रहा?
मनोज सर का कोई भी रोल हो चाहे वो शूल हो, सत्या हो या अलीगढ, मैने उनका काम हमेशा सराहा है। जब यह फिल्म मैने साइन की तो एक एक्साइटमेंट थी। मनोज सर इतने दिग्गज कलाकार है उनके साथ परदे पर रोल करना कैसा होगा ये सब बातें मेरे दिमाग में थी । जब आप स्क्रिप्ट पढ़ते है तो आप अपने करैक्टर में ढल जाते हो और फिर आप के मन में ये नहीं रहता की आप के सामने कौन है, आपका ध्यान हमेशा इस बात पर रहता है की मैं इस करैक्टर को कैसे पूरी तरह दिल लगा के निभाऊं। मनोज सर एक ऐसे एक्टर है जो बहुत सिम्पलिसिटी के साथ एक्शन रिएक्शन वाली केमिस्ट्री अपने कोएक्टर्स के साथ बना लेते है। इस तरह उनके साथ काम करने में भी बड़ा मज़ा आता है। मनोज सर अपना हर रोल ईमानदारी से निभाते है। चाहे करैक्टर की आवाज़ हो या उसका बॉडी लैंग्वेज, वो हर छोटी छोटी बातों पर ध्यान देते है। अगर आपकी ट्यूनिंग उनके साथ एक्टिंग में बन गयी तो काम करने में बहुत मज़ा आता है। उनके साथ काम करके मैं अपने आप को बहुत खुशकिस्मत मानती हूँ।
इस किरदार को निभाने में आपको क्या किसी तरह के चैलेंजेज का सामना करना पड़ा ?
पहले हमने इस फिल्म के लिए रिहर्सल्स की रीडिंग सेशंस हुए। हर करैक्टर का एक क्राफ्ट तैयार हो गया था. इस फिल्म का जो रोल है वो मेरी निजी ज़िन्दगी से बहुत अलग है. एक एक्टर होता है जो अपने लाइफ में हुए इन्सिडेंट्स को ध्यान में रखते हुए अपना रोले निभाता है किन्तु मेरी ज़िन्दगी में इस करैक्टर से रिलेशन करने लायक कोई इन्सिडेंट्स ही नहीं है। एक एक्टर का काम है कैमरा के सामने अपने इमोशंस को चेहरे पर दिखा कर एक्सप्रेस करना, मेरा जो किरदार है वह नॉन एक्सप्रेसिव है। चाहे कोई भी सिचुएशन हो उसको एक्सप्रेस नहीं करना है इसके पीछे भी एक कहानी है की इस लेडी ने अपने लाइफ में इतने उतार चढ़ाव देखे है कि वो फेस पर एक्सप्रेस नहीं कर पाती। एक्सप्रेस करना मुझे बहुत चल्लेंजिंग लगा। मैं ये भी मानती हूँ के इस किरदार के साथ जस्टिस करने में बड़ा कंट्रीब्यूशन हमारे डायरेक्टर अतनु मुख़र्जी का भी है।   
फिल्म की शूटिंग के दौरान हुआ कुछ दिलचस्प लम्हा या इंसिडेंट जो आप शायद कभी नहीं भूल पाएंगी ?
इस फिल्म में मेरा जो घर है, वह बांद्रा का एक बंगला दिखाया गया है। उस एरिया में बहुत सरे गोअन्स (गोवा में रहने वाले ) और कैथोलिक रहते हैं। उस टाइम शायद फेस्टिवल सीजन चल रहा था। जैसे ही हम श्याम को 6 बजे शूटिंग शुरू करते, बहार से नाचगाने की आवाज़ आने लगती थी। उस वक़्त हम बहुत इम्पोर्टेन्ट दृश्य शूट कर रहे थे । जब भी हम सीन परफॉर्म करने जाते, बैकगॉउन्ड में नाच-गाने की आवाज़ आने लगती। लगातार आठ दिन तक ये सिलसिला चलता रहा जो मैं नहीं भूल सकती।
आपको फिल्मो के आलावा क्या शौक है ?
मुझे फिल्म्स देखना भी बहुत अच्छा लगता है। जिस दिन मुझे टाइम मिलता है, मैं आठ या नौ फिल्म देख लेती हूँ। किताबें पढ़ लेती हूँ और मुझे डांस का भी काफी शौक है। मेरी एक और हॉबी है और वो है ट्रैवलिंग मैने एक मराठी प्ले में भाग लिया था जिसके हमने 35 शोज किए थे। इन शोज के बहाने बहुत सारी जगह देखने का मौका मिला। तरहतरह के लोगो से मिलने का मौका मिलता था, उस चीज़ को मैं बहुत बारीकी से स्टडी करती हूँ। अगर कभी कही मेला लगा हो, तो मेले में चली जाती हूँ वहां जा के अलगअलग लोगो को ऑब्ज़र्व करती हूँ कभी कभी उनकी फोटो खींच लेती हूँ एक एक्टर को ऐसा करना कही कही बहुत काम आता है । आगे जा कर जब आप कोई किरदार निभा रहे हो तो ऐसा करना बहुत लाभदायक होता है । मेरी मम्मी भी बोलती थी की मुझे लोगो को ऑब्ज़र्व करने की बचपन से आदत है।
आपने कहा आपको घूमना बहुत पसंद है, आपकी कौनसी फेवरेट जगह है?
नार्थ इंडिया में मुझे मनाली जाना बहुत पसंद है। मुझे सबसे ज़्यादा साउथ इंडिया का कल्चर अट्रेक्ट करता है। वहां की सारी चीज़ें बहुत ट्रेडिशनल और क्लासी होती है  मुझे केरला, गोवा, चेन्नई जाना बहुत पसंद है। मौका मिले तो मैं एजिप्ट और स्पेन एक्स्प्लोर करना पसंद करूंगी।
आपके आज की नारी के बारे में क्या विचार है?
आजकल की जनरेशन में मुझे एक कम्पटीशन की भावना दिखती है, मुझे नहीं लगता की यह सही है। हम हमेशा मर्दो से कम्पीट करने की कोशिश करते है। मुझे लगता है की हम औरतो की एक इंडिविजुअल आइडेंटिटी होती है। मेरे हिसाब से एक औरत होना ही सब से बड़ी शक्ति है। हमारे पास वो पावर है, जिस तरीके से हम इमोशंस को हैंडल कर पाती है। यह एक बहुत सराहनीय क्वालिटी है। अगर मैं अपनी ज़िन्दगी में 5 औरतो को अच्छे से समझ पाई तो मैं समझूंगी की मैं एक अच्छी औरत बन पाई हूँ। एक औरत को समझना ही औरत होने का एहसास है।