दिल्ली की सर्द हवा में घुला खुसरो की रूहानियत से सराबोर संगीत

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musical evening 'Rang-E-Khusrow
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नई दिल्ली – खुसरो का नाम सामने आते ही उनकी शख्सियतए मौहब्बत की इबादत और इंसानियत जीवंत हो उठती है। एक अलग सा अहसास दिल को छू जाता है। दिल को छूती शेरो-शायरी, गीत-संगीत और हज़रत आमीर खुसरो की शख्सियत ए इंसानियत और रूहानी मोहब्बत भरी दास्तां प्रस्तुत करती एक ऐसी ही शाम एनजीओ साक्षी द्वारा दिल्ली के इंडिया हैबीटेट सेन्टर में आयोजित की गई।
जहां गुलाबी ठंड के बीच दिल्लीवासियों ने सितार और अशार एवम् कलाम-ए-खुसरो शीर्षक के अन्तर्गत दो भागों में शेरो-शायरी, कविताओं, सितार की धुन एवम् ग़ज़ल से रूबरू होने का अवसर मिला।

डॉ मृदुला टंडन ने शमा जलाकर कार्यक्रम की औपचारिक शुरूआत की, जिसके बाद जाने-माने शायर व साहित्य जगत से जुड़ी शख्सियत लक्ष्मी शंकर बाजपयी ने शायरी के साथ रूहानियत भरी संध्या का सफर शुरू किया। शायरी के इस सफर को जाने-माने मीडियाकर्मी व लेखक प्रताप सोमवंशी ने आगे बढ़ाया।

शाम का अगला चरण उस्ताद शकील अहमद के नाम रहा। कार्यक्रम की शुरूआत से अंत तक महफिल में उपस्थित दिल्लीवासी वाह! उस्ताद करते नज़र आये।

सुदीप राय की सितार से निकले राग देस में सुर-लय-ताल का खूबसूरत तालमेल दर्शकों को खासा प्रभावित करता नज़र आया। वहीं शकील अहमद ने श्रोताओं को खुसरो की प्रेम की दुनिया से रूबरू कराते हुए जमकर वाह-वाही लूटी।
इस अवसर पर कार्यक्रम की आयोजक डॉ श्रीमति मृदुला टंडन, अध्यक्ष साक्षी ने कहा कि हज़रत अमीर ख़ुसरो 12वींए 13वीं सदी की एक बड़ी शख़्सियत थे जिनमें कई शख़्सियत विद्यमान थीं। वो अहद साज़ शायर भी थे मौसीक़ी के माहिर भी। वो सहिबे तलवार भी थे आज की मॉडर्न हिन्दी और उर्दू उन्हीं की क़लम का जादू है। सर्दियों का मौसम है और यह ललायित करता है ऐसी महफिल के आयोजन के लिए जहां ऐसे दर्शक हों जो बड़ी सादगी के साथ शेरो-शायरी, गीत-संगीत का लुत्फ लें।

डॉ मृदुला टंडन ने कहा हमारा उद्देश्य आज आज के समय में सुकून भरी शाम प्रदान करते हुए हज़रत अमीर खुसरो के जीवन की प्रासंगिकता व प्यार का सूफी संदेश देना है।
उस्ताद शकील अहमद ने कार्यक्रम के लिए दिल्लीवासियों द्वारा दिखाये स्नेह व रूझान हेतु शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा बतौर कलाकार यह मेरे लिए एक यादगार पल है जहां दर्शकों से ज्यादा लुत्फ मैने महसूस किया।